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हेपेटाइटिस सी दो रूपों में आता है: तीवà¥à¤° और जीरà¥à¤£à¥¤ 6 महीने के à¤à¥€à¤¤à¤°, तीवà¥à¤° हेपेटाइटिस सी अपने आप ठीक हो सकता है। यदि à¤à¤¸à¤¾ नहीं होता है, तो रोगी को जीरà¥à¤£ हेपेटाइटिस सी विकसित होने का खतरा होता है, जिसके लिठआजीवन उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी और कà¥à¤› मामलों में, यकृत पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी। हेपेटाइटिस सी केवल रकà¥à¤¤ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ फैलता है, इसलिठसंकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ रकà¥à¤¤ के संपरà¥à¤• में आने से बचने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• सावधानी बरतने से इससे बचा जा सकता है। हेपेटाइटिस सी के मामलों में रकà¥à¤¤ परीकà¥à¤·à¤£ निदान के बाद लीवर बायोपà¥à¤¸à¥€ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होगी ताकि डॉकà¥à¤Ÿà¤° बेहतर ढंग से समठसकें कि लीवर कैसे काम कर रहा है। हेपेटाइटिस सी का उपचार इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि यह पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ है या तीवà¥à¤°à¥¤ जब आपको तीवà¥à¤° हेपेटाइटिस होता है, तो आपको बहà¥à¤¤ सारे तरल पदारà¥à¤¥ पीने चाहिठऔर जितना हो सके आराम करना चाहिà¤à¥¤ यदि संकà¥à¤°à¤®à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ है, और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को यकृत पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है, तो à¤à¤‚टीवायरल दवाà¤à¤‚ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ की जाती हैं।
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